बीकानेर। डूंगर महाविद्यालय के प्राणी शास्त्र के वरिष्ठ व्याख्याता एवं विकिरण वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने अमेरिका के सेन्ट एन्टोनियो में आयोजित बायोफार्मा 2016 अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेकर पत्र वाचन किया है। डॉ. पुरोहित ने सम्मेलन में विकिरणों व भारी धातुओं द्वारा घटते हुए शुक्राणुओं एवं बढ़ती नपुसंकता एवं उनका आंवला तथा अन्य औषधीय पादपों द्वारा बचाव विषय पर विश्व पटल पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
डॉ. पुरोहित ने अनियंत्रित विकिरणों के उपयोग एवं दूषित पानी के कारण बढ़ती नपुसंकता पर चिंता व्यक्त की तथा विश्वभर के वैज्ञानिकों को इसके कारण व निवारण के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
कई देशों के वैज्ञानिक आए
डॉ. पुरोहित ने बताया कि सम्मेलन में अमेरिका के जोर्जिया विश्वविद्यालय के प्रो. टीमुराज लेझावा, स्वीडन के प्रो. हरिशंकर शर्मा, इटली की डॉ. लोरिला रागनी व डॉ. मिटीओ मिकुसी, ऑस्ट्रेलिया की डॉ. मयासा, जापान के डॉ. मत्सुडा, ब्राजील की लीविया स्टोको सहित इथोपिया व कनाडा आदि अनेक देशों के वैज्ञानिकों ने भाग लेकर शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. पुरोहित ने बताया कि सम्मेलन में विश्वभर के वैज्ञानिकों ने डूंगर महाविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग में चल रहे विकिरण जैविकी के शोध कार्यों को विशेष रूप से सराहा। प्रो. टीमुराज ने डूंगर महाविद्यालय के साथ मिलकर संयुक्त शोध कार्य करने की इच्छा व्यक्त की।
डॉ. पुरोहित ने बताया कि सम्मेलन में अमेरिका के जोर्जिया विश्वविद्यालय के प्रो. टीमुराज लेझावा, स्वीडन के प्रो. हरिशंकर शर्मा, इटली की डॉ. लोरिला रागनी व डॉ. मिटीओ मिकुसी, ऑस्ट्रेलिया की डॉ. मयासा, जापान के डॉ. मत्सुडा, ब्राजील की लीविया स्टोको सहित इथोपिया व कनाडा आदि अनेक देशों के वैज्ञानिकों ने भाग लेकर शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. पुरोहित ने बताया कि सम्मेलन में विश्वभर के वैज्ञानिकों ने डूंगर महाविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग में चल रहे विकिरण जैविकी के शोध कार्यों को विशेष रूप से सराहा। प्रो. टीमुराज ने डूंगर महाविद्यालय के साथ मिलकर संयुक्त शोध कार्य करने की इच्छा व्यक्त की।

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