19.12.17

पर्वत सिंह राजपुरोहित ने पेश की ईमानदारी की अनूठी मिसाल

ईमानदारी की एक मिशाल – जो एक वृद्ध दम्पति के लिए चमत्कार से कम नही.

घटना आज दिनांक 19 दिसम्बर 2017 की हे. सुबह में मेरे ऑफिस में पहुचा ही था कि मेरे पास मेरे मित्र श्री पर्वत सिंह राजपुरोहित दासपा का कॉल आया और उन्होंने ने मुझसे कहा की 2 दिन पहले मेरी दूकान में किसी ग्राहक का बटुआ गिर गया हे और कोई भी अभी तक वापिस लेने आया नही हे और उसके बटुए में ऐसी कोई जानकारी नही हे जिसमें उसका मोबाइल न अंकित हो और उससे सम्पर्क किया जा सके. बटुए में था तो 1 SBI का डेबिट कार्ड, 1 HDFC बैंक का क्रेडिट कार्ड, 12350 रूपये नकद और 1 ड्राइविंग लाइसेंस, फिर पर्वतजी ये सब लेकर मेरे ऑफिस आये और हमने ड्राइविंग लाइसेंस के उपर लिखे नाम को सोशियल साईट पर खोजा पर कोई जानकारी नही मिली. और सोचा की इस राशी को किसी गोशाला में दान दे दिया जाय इतने में मेरी नजर ड्राइविंग लाइसेंस पर लिखी जन्म दिनांक पर पड़ी और जन्म वर्ष लिखा हुआ था 1955, फिर सोचा की 62 वर्षीय किसी वृद्ध की डिटेल सोशल साईट पर नही मिल सकती और 2 दिन से कोई बटुआ लेने नही आया ईसका मतलब उस वृद्ध को मालूम ही नही हे की उसका बटुआ कहा गिरा, थोड़ी देर विचार किया और सोचा की उस वृद्ध के लाइसेंस पर लिखे एड्रेस से ही वहा पंहुचा जा सकता हे फिर हमने निश्चय किया की हम उस पते पर जाकर उसका बटुआ आज ही लोटाएंगे एड्रेस भी बहुत दूर था करीब चेन्नई से 40 कि.मी. दूर,
      जैसे तैसे करके हेवी ट्रेफिक में 2 घंटे की बाइक यात्रा करके वहा जा पहुचे और वहा उस वृद्ध के घर को खोज के लिया जैसे ही उनके घर पहुचे और उनके 2 दिन के दुखो की कहानी सुनी तो अपनी आखो की आसूधारा को रोक नही पाए हुआ यु की वह वृद्ध किसी कम्पनी में 10 हजार रूपये की मासिक सेलेरी में कार्य करता हे और उसके घर की आर्थिक स्थिति ख़राब थी और उस के परिवार में 2 बेटीया और वो वो वृद्ध दम्पति कुल 4 सदस्य हे कमाने वाला सिर्फ वह एक वृद्ध व्यक्ति उनकी पत्नी ने कहा की उनके बेटियों की कॉलेज फ़ीस भरने के लिए वो 12 हजार रूपये उनकी कम्पनी के मालिक से उधार लाये थे और वो भी घर आते समय गुम हो गये तो उनकी मानसिक स्थिति खो बैठे 2 दिन से वो उस चिंता में काम पर भी नही जा पा रहे थे और चिंता के आसुओ में डूबे हुए थे 2 बेटीया भी चिंता में थी की कॉलेज की फ़ीस कैसे भरी जाये जो पैसे फ़ीस भरने के लिए लाये थे वो भी गुम गये जैसे ही में और परबतजी उनके घर पहुचे और कहा की आपका बटुआ देने आये हे तो उनके घर खुशियों की लहर आ गयी और उस पुरे परिवार की आखो में ख़ुशी के आसू झलक पड़े वृद्ध महिला 2 दिन की कहानी सुनाते सुनाते रो पड़ी ... और वो देके वापिस लोटे तो ये ही सोचा की देने तो उनका सिर्फ बटुआ गये थे पर करोड़ो की दुआए लेके लोटे... धन्यवाद .... धनराज पुरोहित दासपा

I am proud of you Parvat Singh Rajpurohit

News by shri Satinder Singh Rajpurohit  Triwri (TV reporter)


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