10.7.24

राजपुरोहित श्री किशनदास जी पर कुछ दोहे नरपत सिंह ह्र्दयलेखनी द्वारा

राजपुरोहित श्री किशनदास जी पर कुछ दोहे कविश्री नरपत सिंह राजपुरोहित बावड़ी कला (ह्र्दयलेखनी) द्वारा 
 
राव बिकाजी राज में , पुरोहित दईदास । 
जनम लीयो जिण घर , कुँवर किशनादास ।। 

 दईदासजी जांगळ रे , जुद्ध में आया काम । 
पूत पाटवी किशनजी , गुरुपद चढ्यो नाम ।।

 साँसण मिळगी सांतरी , थोरीखेड़ा गांव । 
पनरेसो इकहत्तर में , कत्थ किशनासर नांव ।।

 सरवर खुदाय चाव सूं , कोहर कोसो कोस । 
जळ सारूं नह भटकणो , हिरदै राख्यो होश ।। 

माँ करणी रो देवरो , थापन कीनो आप । 
ओरण राखी ओपती , मन सूं जपियो जाप ।। 

राव राठौड़ जैतसी , राजगद्दी बीकाण ।  
सोवा गांव री सीवं , घण मन्डयो घमसाण ।। 

जोधाणे (सूं) जुंझ पड़या , वीर किशनजी दास । 
जीव दीयो जांगळ हित ,गढ़ बीकाण उजास ।। 

सताइस गांव रो कुटुम्ब , कहिजै है किशनांण । 
गढ़ बीकाण (में) गाज रह्या , अजतक है ऐनाण ।। 
ह्र्दयलेखनी ।।
धन्यवाद और आभार
लेखक, कवि और भाई श्री नरपतसिंह राजपुरोहित ह्रदय द्वारा कृत ,
चलते-चलते आज कविराज भाई श्री नरपत सिंह जी का जन्मदिन है उनको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं आप जियो हजारों साल ऐसी मंगल कामना है योग आचार्य सवाई सिंह (शौर्य प्रताप) टीम सुगना फाऊंडेशन

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विशेष नोट :- इस रचना को हमने राजपुरोहित समाज इंडिया के फेसबुक पेज से लिया है जिसके एडमिन के रूप में कवि श्री नरपत सिंह राजपुरोहित द्वारा लिखी गई एक रचना है। 

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