संत श्री संस्थान
(अखिलविश्व राजपुरोहित खेतेश्वर युवा सेवा सभी भाईयों को सादर वन्दन🙏🏽
What a great day it was...for all sarwarians ..Really.. can't say too much.. it's completely speechless.. but फिर भी कुछ भाव प्रकट करने की कोशिश करूंगा। गुरुवर ने 7 बजे सरवड़ी पहुंचने का समय दिया था, मैने भी हमेशा की तरह यह सोचा कि साढ़े 7, 8 बजे तक पहुंचेंगे। एक गाड़ी आती हुई दिखी तब भी मैने सोचा कि गाँव की ही गाड़ी होगी कोई, अभी तो 7 ही बजे है। पर गाड़ी पर नजर पड़ी तो चौकं गया। गाड़ी में गुरु महाराज श्री ध्यानाराम जी बैठे थे। 7 बजते ही मन्दिर प्रांगण में पहुंच गए। it shows the punctuality of the great person.
इसके बाद बिना किसी फॉर्मलटी में समय व्यतीत किए, गुरु महाराज जी का सत्संग/प्रवचन/ संस्कार सभा/ हथाई शुरू हुआ। ॐ नमस्कार गुरु सा बारम्बारा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह आरती पहले भी कई बार सुनी, गाई पर इतना ध्यान पहली बार लगा। गुरु ही ब्रह्मा है, ब्रह्मा ही आत्मा है, आत्मा और ब्रह्मा का मिलन ही सत चित आनंद है। वह ब्रह्म जो सर्वत्र है, जो सभी रूपों में है पर जिसका खुद का कोई रूप नहीं। वेदांताचार्य जी ने एक ही आरती में ब्रह्म का स्वरुप समझा दिया।
शिक्षा, संस्कार, संगठन व सेवा का अर्थ व महत्व समझाया, यदि किसी समाज/समुदाय/ गाँव/ राष्ट्र में इन चारों गुणों का समावेश है तो उसकी उन्नति निश्चित है। और यह प्रैक्टिकली प्रूव्ड बात है👍🏽।
देवता- जो देता है
दानव- जो लेता है
मानव- जो लेता भी हो, देता भी हो
ब्रह्मा के संतानों के तीन रूप है। आप लोग किस रूप में रहना पसन्द करते हो, वो आप पर निर्भर करता है।
पुरोहित- पुरोहित वह है जो पुरः( सम्पूर्ण राज्य ) का हित चाहता हो, अर्थात जो व्यक्ति चारों वर्णों के 36 ही कौम के भले की कामना करता हो,जो सभी का हित चाहता हो, वह ही सच्चा ब्राह्मण है, वह ही सच्चा पुरोहित है।
पुरोहित शब्द की यह व्याख्या सुनकर मुझे पुरोहित समाज के गुरुओं पर गर्व महसूस होता है। सम्पूर्ण मानव समाज व मानवता का हित चाहने वाले ही सच्चे सन्त होते है। और मुझे आज यह सोचकर गर्व महसूस होता है कि हमारे गुरु जी की इतनी समावेशी सोच है। खेतेश्वर भगवान व श्री तुलछाराम जी महाराज की भी यही समावेशी सोच रही जो कि अभी भी जारी है व ध्यानाराम जी के माध्यम से सम्पूर्ण राजपुरोहित समाज तक पहुंच रही है।
कहते है कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं, ऐसी मानवतावादी सोच वाले परम् आदरणीय गुरुजनों का हृदय की गहराईयों से नमन।
गुरु जी ने प्रेम- सौहार्द व सहयोग व भाईचारे का सन्देश दिया। नशामुक्त समाज के निर्माण का आव्हान किया।
अपने आसपास साफ़ सफाई रखने का तथा सेवा कार्यों में बढ़ चढ़ कर भागीदार बनने का उपदेश दिया। साथ ही शोशल मीडिया के विवेकपूर्ण इस्तेमाल व परिपक्वता से उपयोग करने का संदेश दिया।
साथियों!
अपने गुरुजनों के दिखाए मार्ग पर चलिए, उनके उपदेशों का पालन कीजिए। आप जो भी कार्य करते है, उसका आत्म मंथन कीजिए।
कार्यक्रम के अंत में विश्व शान्ति पाठ सुखी रहे संसार में, दुखिया रहे न कोय से सम्पूर्ण सनातन धर्म व वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के सन्देश के साथ सभी के मंगल की कामना की गई।
जय ब्रह्माजी री
गुलाब सिंह जी की कलम से

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