27.12.17

वेदान्ताचार्य डॉ. ध्यानाराम जी महाराज ने प्रवचनाें में की कर्म एवं भाग्य की व्याख्या






पाली में स्वामी आत्मानंद राजपुरोहित छात्रावास में आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पहले दिन व्यास पीठासीन वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम जी  महाराज ने गौकर्ण व धुंधुकारी की कथा के माध्यम से कहा कि व्यक्ति जन्म से नहीं कर्म सेसंस्कारित होता हैं।

       हमें राग, द्वेष व मतभेद भुलाकर आपस में प्रेमभाव से रहना चाहिए। एक ही माता- पिता की संतानों में भी कर्मों केआधार पर भिन्नता आ जाती हैं।

    अतः हमें सत्कर्मकी और ध्यान देना चाहिए। श्रीमद भागवत का महात्म्य बताते हुए वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम जी महाराज ने कहा कि इसके श्रवण मात्र से ही व्यक्ति का कल्याण हो जाता हैं। भगवतप्राप्ति का माध्यम भागवत हैं।
         वहीं सर्व ब्रह्म समाज से भीकी भक्त भागवत कथा केदौरान मौजूद रहे। शाम के समय आरती का आयोजन किया गया। साथ ही कथा का सीधा प्रसार संत श्री संस्थान के facebook पेज से लाइव भी किया जा रहा है

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