15.2.18

हम 21वीं सदी में भी "वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिता" कहलाने के हकदार हैं

समस्त ब्रह्म समाज के सम्माननीय अग्रजनों  मेरा सादर नमन, प्रणाम जय श्री रघुनाथ जी की! मेरे युवा साथियों को जय दाता की आज परम पूज्य वेदांताचार्य जी ने गुरुदेव तुलसाराम जी महाराज की आदेश से एक हस्तलिखित पत्र जारी किया है और यह पढ़कर कुछ भार्मिक बातें जो हो रही है उसका निवारण हो जाता है! महा सावित्री पीठ से महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर समाज हित में समाज द्वारा समाज के संतों द्वारा दाता को साक्षी मानकर के जो निर्णय लिए गए हैं उस निर्णयो का हमें अनुकरण करना है, स्वागत करना है, और उसकी पालना करनी है! उनकी पालना नहीं करने वाले ब्रम्हधाम और संतों और समाज की अवहेलना है, यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की अवेलहना करते हैं तो वह संत समाज और समाज से अपने आप को बड़ा समझते हैं और उनका हमें साथ नहीं देना चाहिए! उनके कार्यक्रम में शरीक नहीं होने चाहिए यह निष्ठा रखनी होगी तभी ब्रम्हधाम की जो निष्ठा है वह परिपूर्ण होगी ब्रह्मधाम ने जो निर्णय लिया है वह राजपुरोहित समाज ही नहीं अपितु 36 कोम के लिए एक अच्छा संदेश है और यह निर्णय लेकर के ब्रह्मधाम ने साबित कर दिया कि हम 21वीं सदी में भी "वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिता"
कहलाने के हकदार हैं आप सभी को पुनः नमन प्रणाम


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