संविधान भले ही बना हो, संविधान का पालन तो केवल समाज को चाहने वाले, समाज को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से और व्यक्तिगत सम्मान से भी ऊपर समझने वाले, अपनी आने वाली सैंकड़ों पीढ़ियों के हितों की चिंता करने वाले, अपने गरीब रिश्तेदारों के प्रति ह्रदय में प्रेमभाव रखने वाले, गरीब रिश्तेदारों की पीड़ा को समझने और उसमें सहभागी बनने की इच्छा रखने वाले ही ब्रह्मधाम आसोतरा की जाजम पर बने नियमों का पालन अवश्य करेंगे।
बाकी के शेष लोग, जिन्हें समाज और समाज के भविष्य की चिंता नहीं हैं, जिन्हें अपने गरीब रिश्तेदारों के प्रति हमदर्दी नहीं हैं, जो अपने गरीब रिश्तेदारों को रोते , तड़पते मरते देखने के पक्षधर हैं, वे लोग किसी भी सूरत में आज से लागू समाज के संविधान पर नहीं चलेंगे। ऐसे अपने अहम् और धन के प्रदर्शकर्ताओं को आप क्या कहेंगे ? समाज के हितैषी या समाज के हत्यारे ?
मैं बड़ा नहीं हूँ, मेरा समाज बड़ा हैं,
मेरा सम्मान बड़ा नहीं हैं, मेरे समाज का सम्मान बड़ा हैं,
मेरा हित बड़ा नहीं हैं, मेरे समाज का हित बड़ा हैं,
मेरा स्वाभिमान बड़ा नहीं, मेरे समाज का स्वाभिमान बड़ा हैं,
मेरी प्रतिष्ठा बड़ी नहीं, मेरे समाज की प्रतिष्ठा बड़ी हैं,
मेरी इज्जत बड़ी नहीं, मेरे समाज की इज्ज़त बड़ी हैं,
मैं मेरे समाज के हित के लिए, अपना हित त्याग दूँगा,
मैं अपने समाज के विकास के लिए, अपना विकास त्याग दूँगा,
मैं अपने समाज के लिये सब कुछ त्यागने के लिए तैयार रहूँगा,
क्या आप भी इस विचार से सहमत हैं ?
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।।जय श्री खेतेश्वर।।
!! बलवंत सिंह राजपुरोहित !!

हा मेरे समाज के लिए सब कुस तियाग ने के लिए सहमत हूँ
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