11.2.18

समाजहित में एक ऐतिहासिक प्रयास एक लाख पत्रक छपवा कर समाज के गाँव गाँव पहुँचाये गये।

समाज हित में एक ऐतिहासिक प्रयास सन 2005-06 में एक लाख पत्रक छपवा कर समाज के गाँव गाँव पहुँचाये गये। सन 1990 से समाज बंधुओं की विभिन्न राजपुरोहित पत्र-पत्रिकाओं में जनजागरण निमित्त सँयुक्त राष्ट्र संघ की The glimpses of girlhood in India report पढ़ने के बाद लिखे जाते रहे।
          परन्तु जनजागरण आज भी वास्तविक धरातल पर नहीं हुआ। बेटियों की कमी का मुख्य कारण बेटियों का बोझ होना हैं। अब वो चाहे नारी उत्पीड़न के कारण हो या बाह्य दूषित वातावरण हो या दहेजप्रथा हो। हमें अगर लिंगानुपात में यथोचित सुधार करना है तो नारी समाज के हित में चहुँ ओर हर दृष्टिकोण से सुधारात्मक रवैया अपनाना होगा और समाज के हर बँधु को आगे चलकर सहयोग करना होगा। समाज के हर युवा को निरपेक्ष भाव से कठोर निर्णय लेने होंगे। दोगलापंथी को पुरजोर चोट करनी होगी। सगाई/ शादी समारोह पर अपने धन के अहंकार के प्रदर्शन को हर हाल में समाज हित में रोकना होगा और इस अहंकारित प्रदर्शन को जायज ठहराने वालों पर लगाम लगानी होगी।

11-12 फ़रवरी को समाज का ऐतिहासिक सम्मेलन होने जा रहा हैं। इस सम्मेलन के सभी सहभागियों से मेरा नम्र निवेदन है कि समाज में लिंगानुपात को सुधारने निमित्त निम्न बिंदुओं पर विचार विमर्श करें और यथासंभव उन्हें लागू करने का प्रयास करें।

1. धन का नियोजन सर्वाधिक रूप से सभी बेटे और बेटी की पूर्ण शिक्षा पर हो और समाज के सभी रीति रिवाजों के नाम पर धन का प्रदर्शन कर अपने अहंकार को प्रदर्शित करने पर रोक लगे। जो धन समाज की कुरीतियों पर खर्च होता हैं, अगर उसका आधा धन भी बेटे बेटी की शिक्षा पर खर्च हो तो हर परिवार शिक्षित और समृद्ध होगा तथा हमारा समाज फिर से राजगुरू की पदवी के योग्य बन जायेगा।

2. जिस भी बँधु के चार-पांच बेटीयाँ या इससे अधिक हो, उनका ब्रह्मधाम के मंच से सम्मान हो तथा उन बेटियों की शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था अभिभावकों की सहमति से समाज करें।

3. प्रत्येक गाँव में प्रति रविवार समाज के बँधु सभी राजपुरोहित विद्यार्थियों के लिए संस्कारशालायें आयोजित करे। ताकि हमारी गौरवशाली संस्कृति और समाज की मर्यादा बनी रहे।

4. समाज में श्रेष्ठ कार्य करने वालों को ब्रह्मधाम के मंच से खेतश्री की उपाधि से विभूषित किया जाये। ताकि समाज सेवियों की तादाद अधिकतम बढ़ सके और अच्छे कार्य करने की होड़ बढ़े।

5. समाज में खेतेश्वर भवन से पहले खेतेश्वर विद्यालय/महाविद्यालय बने। खेतेश्वर विद्यालय/महाविद्यालय बनने के बाद ही उस क्षेत्र में खेतेश्वर भवन की बात सोची जाये। कुल मिलाकर धन का नियोजन सबसे पहले शिक्षा पर हो, उसके बाद ही भवन/धर्मशाला/मंदिर पर हो।

          संतगुरुदेव की हम सभी पर अक्षुण्ण कृपा बरसे और हम सभी समाज हित में सकारात्मक दिशा में कँधे से कँधा मिलाकर एकता और सहयोग के साथ आगे बढ़े। सद्गुरुदेव हम सभी को ये शक्ति प्रदान करें। इसी प्रार्थना के साथ
।।जय श्री खेतेश्वर।।

   ये पहल थी श्री मेघ सिंह राजपुरोहित की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ ...... सुगना फाउंडेशन परिवार


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