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न्यूज़ हेडलाइंस LATEST: Sawai Singh Rajpurohit

21.3.16

रक्तदान है महादान... आओ करें रक्तदान.... Sugana Foundation-Meghlasiya






आज मैने भी रक्तदान किया जीवनरक्षक सोसाइटी द्वारा समर्पण ब्लड बैंक, डेल्ही गेट, आगरा में मुझे बहुत अच्छा लगा ....

आज 20 मार्च 2016 शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में न केवल आगरा अपितु उत्तर भारत के लगभग 25 स्थानों पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया किया गया था !

इन शिविरों के माध्यम से देश भर में अपने देश के क्रन्तिकारी शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को श्रद्धांजलि और पूरे देश में रक्तदान के प्रति जागरूकता लाने का एक प्राय किया जा रहा है और मैने भी अपने लहू से माँ भारती के उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलिदी 

जिन्होंने 23 मार्च के दिन हँसते हँसते माँ भारती की आज़ादी के लिए फांसी का फंदा अपने हाथों से गले में डाला था 

सवाई सिंह राजपुरोहित 
सदस्य सुगना फाउंडेशन-मेघलासिया 
.

रक्तदान जीवनदान है। हमारे द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियों को बचाता है। इस बात का अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई अपना खून के लिए जिंदगी और मौत के बीच जूझता है। उस वक्त हम नींद से जागते हैं और उसे बचाने के लिए खून के इंतजाम की जद्दोजहद करते हैं। 

अनायास दुर्घटना या बीमारी का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है। आज हम सभी शिक्षि‍त व सभ्य समाज के नागरिक है, जो केवल अपनी नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए भी सोचते हैं तो क्यों नहीं हम रक्तदान के पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान करें और लोगों को जीवनदान दें।

देशभर में रक्तदान हेतु जीवन रक्षक , नाको, रेडक्रास जैसी कई संस्थाएँ लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही है परंतु इनके प्रयास तभी सार्थक होंगे, जब हम स्वयं रक्तदान करने के लिए आगे आएँगे और अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी इस हेतु आगे आने के लिए प्रेरित करेंगे। 

जो रक्तदान कर सकते हैं :

चलो दूसरों को अपने अच्छे स्वास्थ्य से लाभ पहुँचाएं ! रक्तदान करें अगर.... 

* कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसकी आयु 18 से 68 वर्ष के बीच हो।
* जिसका वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो। 
* जिसके रक्त में हिमोग्लोबिन का प्रतिशत 12 प्रतिशत से अधिक हो। 
*आपने तीन महीने पहले रक्तदान किया हो।
*आप स्वस्थ हैं और हाल ही में मलेरिया, टाइफाइड या किसी अन्य संक्रामक रोग से पीड़ित नहीं हैं।

वहाँ बहुत से लोग हैं, जो स्वास्थ्य और फिटनेस के इन मानकों को पूरा करते हैं!

ये नहीं करें #रक्तदान
* महावारी के दौर से गुजर रही महिला। 
* बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिला।

4 comments:

  1. रक्तदान करने से गर्व महसूस होता है, यह किसी की ज़िंदगी को छूने का एक सुनहरा रास्ता है। यह एक ऐसा अनुभव है जिसको शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। आप रक्तदान करके खुद की पहचान बनाते हैं। नियमित रक्तदान करके आप स्वस्थ और खुशहाल समाज के लिए बहुत बड़ा योगदान देंगे। याद रखिए! रक्त कि जरूरत किसी को भी किसी भी समय हो सकती है। जिसमें आप खुद या आपके परिजन भी हो सकते हैं। रक्तदान करके आप अन्य तरीके से भी लाभ उठाते हैं।


    रक्त की जरूरतों का सत्य :
    हमारे देश में हर साल लगभग १० करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है, जिसमें अल्प मात्रा में केवल ४० लाख यूनिट ही उपलब्ध हो पाता है।
    रक्त का उपहार जीवन का उपहार है। मानव रक्त का कोई भी विकल्प नहीं है।
    हर दो सेकेंड में किसी न किसी को रक्त की जरूरत पड़ती है।
    हर दिन ३८००० से अधिक रक्तदान की जरूरत है।
    प्रत्येक वर्ष कुल ३० करोड़ रक्त घटक चढ़ाया जाता है।
    औसतन लगभग ३ पिंट लाल रक्त कोशिका चढ़ाया जाता है।
    अस्पतालों में अक्सर सबसे ज्यादा ओ प्रकार के रक्त की जरूरत पड़ती है।
    सिकल सेल के रोगियों को पूरी ज़िंदगी रक्त चढ़ाने की ज़रूरत पड़ सकती है।
    हर साल 1 लाख से अधिक लोगों को कैंसर होता है। जिनमें से कई को कीमोथेरेपी इलाज के दौरान रक्त की ज़रूरत पड़ती है, कभी कभी प्रतिदिन भी ज़रूरत पड़ सकती है।
    अकेले एक कार दुर्घटना के शिकार लोगों को १०० यूनिट रक्त की ज़रूरत पड़ सकती है।

    रक्त की आपूर्ति का सच :
    रक्त का निर्माण नहीं किया जा सकता है – यह केवल उदार दाताओं द्वारा ही आ सकता है।
    ओ-निगेटिव प्रकार का रक्त(लाल कोशिकाएं) सभी प्रकार के रक्त के रोगियों को चढ़ाया जा सकता है। इसकी हमेशा माँग रहती है और इसकी हमेशा कमी रहती है।
    ए बी- पॉज़िटिव प्रकार का प्लाज़्मा अन्य सभी प्रकार के रक्त के रोगियों को चढ़ाया जा सकता है। आम तौर पर ए बी प्लाज़्मा की भी कमी रहती है।

    रक्तदान की प्रक्रिया का सच :
    रक्तदान एक सुरक्षित प्रक्रिया है। एक रोगाणुरहित सुई केवल एक बार प्रत्येक दाता के लिए प्रयोग किया जाता है और फिर फेंक दिया जाता है।
    रक्तदान प्रक्रिया के चार सरल चरण हैं- पंजीकरण, चिकित्सा का इतिहास और छोटी सी शारीरिक जाँच, दान और जलपान।
    हर रक्तदाता का शारीरिक तापमान, ब्लड प्रेशर, नाड़ी और हीमोग्लोबीन की जाँच होती है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके की रक्तदाता दान करने के लिए सुरक्षित है।
    वास्तविकता में आम तौर पर रक्तदान में १०-१२ मिनट का समय लगता है। आप के आने से लेकर आप के जाने तक की पूरी प्रक्रिया में लगभग एक घंटा पंद्रह मिनट का समय लगता है।
    वयस्क के शरीर में औसत १० यूनिट रक्त की मात्र होती है। आम तौर पर एक रक्तदान के दौरान १ यूनिट रक्त दिया जाता है।
    एक रक्तदाता लाल रक्त कोशिकाओं को हर ५६ दिन या दोहरे रक्त कोशिकाओं को हर ११२ दिनों में दान कर सकता है।
    एक स्वस्थ दाता ७ दिन के अंतराल पर प्लेटलेट्स दान कर सकता है। लेकिन एक साल में अधिकतम २४ बार ही दे सकता है।
    रोगियों को रक्त चढ़ाने से पहले सभी दान किए हुए रक्त में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस और अन्य संक्रामक रोगों का परीक्षण किया जाता है।

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  2. रक्त और उसके घटकों का सच :
    आप के कुल शारीरिक वजन का ७ प्रतिशत रक्त है।
    रक्त से चढ़ाने लायक ४ प्रकार के तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं : लाल कोशिकाएं, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और cryoprecipitate. आम तौर पर दान किए हुए पूरे एक यूनिट रक्त से २ या ३ तत्व निकाला जाता है। इसलिए प्रत्येक दान तीन जीवन बचाने में मदद कर सकता है।
    दाता पूरा रक्त या केवल रक्त का विशेष तत्व दे सकता है। विशिष्ट रक्त घटक – लाल रक्त कोशिकाओं, प्लाज्मा या प्लेटलेट्स के दान की प्रक्रिया अफेरेसिस कहलाती है।
    प्लेटलेट्स चढ़ाने की एक खुराक प्लेटलेट्स की एक अफेरेसिस दान के माध्यम से या पाँच पूरे रक्त दान से प्राप्त प्लेटलेट्स के संयोजन से प्राप्त किया जा सकता है।
    दान किया हुआ प्लेटलेट पाँच दिन के भीतर इस्तेमाल हो जाना चाहिए।
    स्वस्थ अस्थि मज्जा लाल कोशिकाओं, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की एक निरंतर आपूर्ति बनाता है। शरीर एक रक्तदान के दौरान दिए गए तत्वों को एक घंटे में और कुछ दूसरे मामले में एक सप्ताह में फिर से भर लेता है।

    दाताओं के बारे में तथ्य :
    खून देने का पहला कारण दाता बताते हैं कि वे “दूसरों की मदद करना चाहते हैं।”
    दूसरा कारण जो लोग रक्त नहीं देना चाहते बताते हैं कि “इसके बारे में कभी सोचा नहीं था और मुझे सुइयों से डर लगता है।”
    एक रक्तदान तीन लोगों की जान बचा सकता है।
    यदि आप ने १८ साल की आयु में रक्तदान शुरू किया और हर ९० दिनों में रक्तदान करते हैं तो ६० साल की आयु तक आप ने ३० गैलन रक्त दान किए और संभवतः आप ने ५०० लोगों की जान बचाने में मदद की!
    भारत में केवल ७ प्रतिशत लोगों के रक्त का प्रकार ओ निगेटिव है। ओ निगेटिव प्रकार का रक्तदाता यूनिवर्सल दाता होता है, जिससे उसका रक्त सभी प्रकार के रक्त के लोगों को दिया जा सकता है।
    आपातकाल की स्थिति में मरीज के रक्त का प्रकार जानने से पहले ओ निगेटिव रक्त की जरूरत पड़ती है, इसके साथ ही नवजात शिशु को भी जरूरत पड़ती है।
    35 प्रतिशत लोग ओ प्रकार के रक्त (निगेटिव या पोसिटिव) के होते हैं।
    ०.४ प्रतिशत लोग AB रक्त प्रकार के होते हैं। AB प्रकार के रक्तदाता का प्लाज्मा हर प्रकार के रक्त के रोगियों को चढ़ाया जाता है जो की आपात स्थिति में नवजात शिशुओं को और जिन रोगियों को ज्यादा चढ़ाने की जरूरत होती है उनके लिए प्रयोग किया जाता है।

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  3. हमारे नियमों का पालन करिए – अपने स्वास्थ्य की स्थिति को लेकर सच्चे रहिए!

    रक्त लेने से पहले और लेने के बाद इसकी सुद्धता की जाँच की जाती है। सबसे पहले, दाता को उसके स्वास्थ्य के इतिहास और वर्तमान स्थिति के बारे में ईमानदार होने की उम्मीद है। दूसरे, एकत्र रक्त यौन रोगों, हेपेटाइटिस बी और सी और एड्स का परीक्षण किया जाता है।

    आप को सुरक्षित रक्त देने के लिए स्वस्थ रहना है।

    जो रक्तदान नहीं कर सकते :

    अगर आपकी इनमें से कोई भी स्थिति है तो रक्तदान न करें !
    पिछले एक हफ्ते से ज़ुकाम या बुखार।
    एंटीबायोटिक दवाओं या किसी अन्य दवा के साथ उपचार के तहत।
    हृदय की समस्या, उच्च रक्तचाप, मिर्गी, मधुमेह (इंसुलिन थेरेपी पर), कैंसर, क्रोनिक गुर्दे या यकृत रोग के इतिहास, खून बहने की प्रवृत्तियों, यौन रोग आदि।
    पिछले ६ महीने में कोई बड़ी सर्जरी।
    पिछले २४ घंटे में टीकाकरण।
    पिछले 6 महीनों में गर्भपात हो गया था या गर्भवती / पिछले एक वर्ष से बच्चे को दूध पीला रही हों।
    पिछले दान के दौरान बेहोशी हुई हो।
    नियमित रूप से रक्त के घटकों द्वारा इलाज होता हो।
    इंजेक्शन के लिए एक ही सुई साझा की गयी हो या मादक पदार्थों की लत का इतिहास हो।
    विभिन्न भागीदारों के साथ या एक उच्च जोखिम वाले व्यक्ति के साथ यौन संबंध थे.
    एचआईवी एंटीबॉडी के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया.

    गर्भावस्था और माहवारी
    महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान रक्तदान नहीं करना चाहिए।
    वे नॉर्मल प्रसव के ६ हफ्ते बाद दान कर सकती हैं अगर बच्चे को अपना दूध नहीं पीला रही है।
    महिलाओं को अगर भारी माहवारी स्राव या माहवारी का ऐंठन हो रहा हो।

    रक्तदान के लिए सुझाव :
    रक्तदान करने से कम से कम ३ घंटा पहले अच्छी तरह से खाना खा लें।
    रक्तदान के बाद दिया हुआ नाश्ता लें, यह आपके लिए महत्वपूर्ण है। आप से सिफ़ारिश की जाती है कि बाद में आप पौस्टिक भोजन लें।
    रक्तदान करने से पहले उस दिन धूम्रपान न करें। आप दान के ३ घंटे बाद धूम्रपान कर सकते हैं।
    अगर आप ने रक्तदान करने से ४८ घंटे पहले शराब का सेवन किया है तो आप रक्तदान नहीं कर सकते।

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  4. रक्तदान के बारे में गलत धारणाएँ
    “मैं दान के बाद सूखा और थका हुआ महसूस करूंगा” – अगर आप तरल पदार्थ और एक अच्छा भोजन लेते हैं तो सूखा और थका हुआ महसूस नहीं करेंगे।
    “मैं सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू नहीं कर सकता”- आप अपने सभी सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं, जबकि आप ने बचने के लिए पूछा है।
    “मेरे अंदर खून कि कमी हो जाएगी” – अगर चिकित्सक ने दान के लिए इजाजत दे दी है तो दान के बाद भी आपका रक्त फालतू होगा।
    “मैं शराब का सेवन नहीं कर सकता......” – आप अगले दिन से ले सकते हैं।
    “दान के दौरान दर्द होगा” – नहीं, आप किसी भी प्रकार का दर्द महसूस नहीं करेंगे।
    “मुझे चक्कर और बेहोसी आ जाएगा” – आपको रक्तदान के बाद बेहोशी या असहज महसूस नहीं होगा।
    “मुझे एड्स हो सकता है” – नहीं! सुनिश्चित करें कि डिस्पोज़ेबल सिरिन्ज का इस्तेमाल किया जा रहा है, और आपको रोगाणु मुक्त करने के लिए हर प्रकार के उपाय किए जाते हैं।
    “मेरा खून आम है, मुझे नहीं लगता कि इसकी मांग की जाएगी” – यही कारण है कि आप के प्रकार की मांग दुर्लभ प्रकार की तुलना में अधिक है।

    :: रक्तदान के स्वास्थ्य लाभ ::

    रक्तदान का शरीर पर कोई भी दुष्प्रभाव नहीं है, बल्कि रक्तदान के कई लाभ हैं, जिनमें नीचे कुछ सूचीबद्ध हैं

    हृदय रोगों की संभावना कम होती है :-
    यह देखा गया है कि रक्त मे आइरन की मात्रा बढ्ने से हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है। आयरन कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण में शामिल है और यह प्रक्रिया धमनियों के लिए हानिकारक माना जाता है। कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीकरण की इस प्रक्रिया से रक्त में आइरन की मात्रा बढ़ जाती है और इस तरह से हृदय रोग हो जाता है। नियमित रक्तदान खास कर पुरुषों में आइरन को घटाने में नियमित रूप से मदद करता है। यह एक तिहाई दिल का दौरा पड़ने की संभावना को कम करता है।

    नई लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए :-
    जैसे ही दाता के शरीर से रक्त लिया जाता है, उसके रक्त कोशिकाओं में कमी आ जाती है। इसकी पूर्ति के लिए मज्जा तुरंत नए कोशिकाओं का उत्पादन करता है, इस तरह से रक्त ताजा हो जाता है। इसलिए रक्तदान नई रक्त कोशिकाओं के उत्तेजक पीढ़ी में मदद करता है।

    हीमोक्रोमाइटोसिस से लड़ने में मदद करता है :-
    हीमोक्रोमाइटोसिस एक आनुवांशिक विकार है, जिसे आइरन की अधिकता भी कहा जाता है, जिसमे आइरन के अनुचित चयापचय के कारण यह शरीर के उत्तकों में जमा हो जाता है। इस हालत में अंग की क्षति हो सकती है। हालांकि यह समस्या भारतीयों में असामान्य है, आइरन की कमी वाले लोग भी आसानी से रक्तदान कर सकते हैं और आइरन तत्व को कम कर सकते हैं। अन्य देशों का उदाहरण लेते हुए, इंग्लैंड में हर ३००-४०० में एक ब्यक्ति इस विकार से ग्रसित है और अमेरिका रेड क्रॉस रक्त सेवा इस तरह के दाताओं को सुरक्षित दाता के रूप में स्वीकार करता है, यह एक आनुवांशिक विकार है। जो व्यक्ति ऐसे दाताओं से रक्त प्राप्त करते हैं, यह उनके लिए हानिकारक नहीं नहीं होगा।

    कैलोरी जलती है :-
    एक आहार या नियमित रूप से रक्तदान से फिट रह सकते हैं। जब एक पिंट (४५० मिलीलीटर) रक्त दान किया जाता है तो दाता के शरीर से ६५० कैलोरी जलता है।

    बुजुर्गों में शक्ति महसूस होती है :-
    यह साबित नहीं है, हालांकि विभिन्न स्थलों में उल्लेख किया गया है कि बुजुर्गों ने यह सूचना दी कि नियमित आधार पर खून देकर स्वास्थ्य में शक्ति या पुनः सक्रियता महसूस किया है।

    बुनियादी रक्त परीक्षण हो जाता है :-
    इन सभी लाभों के अलावा रक्तदान से पहले दाता के रक्त की कुछ जाँचे हो जाती हैं। इसमें शामिल है हेमैटोक्रिट यानि एचबी स्तर परीक्षण, रक्तचाप, शरीर के वजन की जाँच है। रक्त एकत्र करने के बाद ५ प्रमुख बीमारियों के लिए परीक्षण किया जाता है। जो हैं हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, एचआईवी, सिफलिस और मलेरिया। अगर इनमें से कोई भी सकारात्मक पाया जाता है तो दाता को तुरंत सूचित किया जाता है।

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