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27.10.26

एक व्यक्ति का त्याग, पूरे समाज के लिए प्रेरणा एडवोकेट राजपुरोहित

 एक व्यक्ति का त्याग, पूरे समाज के लिए प्रेरणा 

आदरणीय एडवोकेट घीसू सिंह राजपुरोहित रूपावास (पूर्व सरपंच रूपावास) से समाज को सीख लेनी चाहिए।

हाल ही में आदरणीय एडवोकेट घीसू सिंह राजपुरोहित जी से मुलाकात कर गांव और समाज के प्रति उनके विचारों को जानने का अवसर मिला। उनसे बातचीत के दौरान उनकी भावनाओं, दूरदर्शिता और गांव की एकता के प्रति समर्पण को देखकर मन में एक ही विचार आया कि यदि राजपुरोहित समाज का प्रत्येक बंधु इसी सोच के साथ आगे बढ़े, तो हमारा समाज और हमारे गांव निश्चित रूप से नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।

 पिछली हार से मिली सीख, इस बार एकता से मिली जीत!

आदरणीय घीसू सिंह जी ने बताया कि पिछली बार पंचायत चुनाव में सामान्य सीट होने के बावजूद समाज के कई बंधु चुनाव मैदान में उतरे थे। इसका परिणाम यह हुआ कि अन्य समाज के ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। चुनाव परिणाम के बाद समाज के सभी भाई मंदिर में एकत्रित हुए और इस बात पर आत्ममंथन किया कि यदि हम एकजुट रहते, तो परिणाम कुछ और हो सकता था। उस समय सभी ने भविष्य में एकता बनाए रखने का विश्वास दिलाया था।

लेकिन लगभग सात वर्ष बाद जब पुनः सामान्य सीट पर चुनाव लड़ने का अवसर आया, तब समाज के कुछ बंधु एकता की बात करने के बावजूद अलग-अलग दावेदारी करने लगे। यह देखकर घीसू सिंह जी को गहरा दुख हुआ। उनके मन में एक ही चिंता थी कि कहीं पिछली बार जैसे हालात फिर से न बन जाएं और समाज को दोबारा पछताना न पड़े।

 स्वयं की दावेदारी छोड़कर गांवहित को प्राथमिकता दी!

घीसू सिंह जी स्वयं सरपंच पद के लिए दावेदारी कर चुके थे। उनके पास चुनाव लड़ने का पूरा अवसर था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर गांव और समाज के भविष्य के बारे में सोचा।

उन्होंने अपने परिवार के बच्चों से भी विचार-विमर्श किया और अंततः गांव की एकता एवं व्यापक हित को प्राथमिकता देते हुए अपनी दावेदारी से पीछे हटने तथा समाज के योग्य बंधु का समर्थन करने का निर्णय लिया।

इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, समर्थकों और 36 कौम के साथियों को साथ लेकर सरपंच उम्मीदवार आदरणीय बाबू सिंह जी राजपुरोहित का समर्थन किया।

यह केवल चुनाव से पीछे हटने का निर्णय नहीं था, बल्कि समाज की एकता, गांव के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को प्राथमिकता देने का उदाहरण था।

 समझाने का प्रयास किया, गांव की मर्यादा के लिए संघर्ष किया!

घीसू सिंह जी ने बताया कि गांव में अन्य दावेदारों को भी समझाने का भरपूर प्रयास किया गया। उनसे निवेदन किया गया कि व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर उठकर गांव के व्यापक हित और सामाजिक एकता के बारे में विचार करें, लेकिन सहमति नहीं बन पाई।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी समर्थक टीम के साथ 36 कौम के लोगों से संपर्क किया, सभी समाजों के भाइयों से सहयोग का निवेदन किया और गांव की एकता एवं सम्मान के लिए पूरी मेहनत की।

अंततः बाबू सिंह जी राजपुरोहित की जीत हुई। घीसू सिंह जी ने इस जीत को किसी एक व्यक्ति या समाज की जीत नहीं, बल्कि पूरे गांव की जीत मानते हुए इसे ग्रामवासियों को समर्पित किया।

उनका मानना है कि इस बार भी अन्य समाज के उम्मीदवारों से कड़ी चुनौती थी। ऐसे में चारभुजा नाथ जी की कृपा, गांववासियों के पुण्य और एकजुट प्रयासों से यह सफलता मिली।

 दूसरे चरण के चुनावों में समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश!

आदरणीय घीसू सिंह जी ने एक और महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में ऐसे कई गांवों में, जहां राजपुरोहित समाज की संख्या अच्छी होने के बावजूद एक से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे, वहां दूसरे समाज के उम्मीदवारों को जीतने का अवसर मिला।

इसी अनुभव के आधार पर उनका दूसरे चरण में होने वाले पंचायत चुनावों के लिए सभी समाजबंधुओं से विनम्र निवेदन है कि जहां राजपुरोहित समाज की स्थिति मजबूत हो और दो या दो से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हों, वहां समय रहते आपसी बातचीत, समझदारी और सहमति से गांव एवं समाज के हित में निर्णय लिया जाए।

यदि आवश्यकता पड़े, तो किसी एक बंधु को समाज और गांव की एकता के लिए अपनी दावेदारी छोड़ने का साहस दिखाना चाहिए। यह निर्णय किसी की हार नहीं, बल्कि सामूहिक भविष्य की जीत बन सकता है।

समाज के प्रत्येक बंधु के लिए एक संदेश!

राजनीति में दावेदारी करना गलत नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने का अधिकार है, लेकिन जब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और सामूहिक हित के बीच चुनाव करने का समय आए, तब समाज के हित को समझना ही सच्ची दूरदर्शिता है।

समाज की ताकत केवल हमारी संख्या में नहीं, बल्कि हमारी एकता, आपसी विश्वास और सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता में है।

आदरणीय एडवोकेट घीसू सिंह राजपुरोहित जी ने अपने निर्णय से यह संदेश दिया है कि सच्चा नेतृत्व केवल पद प्राप्त करने में नहीं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पद की दावेदारी छोड़कर समाज और गांव को मजबूत बनाने में भी है।

आइए, हम सभी उनके इस निर्णय से प्रेरणा लें। आपसी मतभेद भुलाकर समाज की प्रतिष्ठा, गांव के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट हों।

याद रखिए—जब समाज एकजुट होता है, तो उसकी आवाज मजबूत होती है; जब समाज बंटता है, तो उसका अवसर दूसरों के हाथों में चला जाता है।

एकता ही हमारी पहचान है। समाज का सम्मान ही हमारा स्वाभिमान है। गांव का विकास ही हमारा संकल्प है। 

जय राजपुरोहित समाज! जय चारभुजा नाथ री! जय रघुनाथ जी री सा! 

23.10.26

समस्त Rajpurohit Samaj से एक विशेष अपील

 समस्त राजपुरोहित समाज से एक विशेष अपील

मेरे प्यारे राजपुरोहित समाज के सभी भाई-बंधुओं, गिणायतों और समाज के शुभचिंतकों से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है।

राजस्थान में पंचायती राज चुनावों का दौर चल रहा है। इस चुनावी मैदान में हमारे समाज के भी कई भाई अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वे केवल अपनी जीत के लिए नहीं, बल्कि समाज की राजनीतिक भागीदारी, पहचान और आने वाले समय में हमारे समाज की आवाज को मजबूत बनाए रखने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

आज वक्त है सोचने का, समझने का और एकजुट होने का।

मेरे भाइयों, आपस में मतभेद हो सकते हैं, मनभेद हो सकते हैं, किसी से नाराजगी हो सकती है, विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन क्या इन सबके कारण हम अपने ही समाज के भविष्य को कमजोर होते हुए देख सकते हैं?

आज अगर हम आपसी खींचतान और छोटी-छोटी नाराजगियों में उलझकर एक-दूसरे का साथ नहीं देंगे, तो कल जब राजनीति में हमारे समाज की आवाज कमजोर होगी, तब हमारे पास पछतावे के सिवाय क्या बचेगा?

याद रखना भाइयों, समय निकल जाने के बाद अफसोस करने से अवसर वापस नहीं आते।

आज हमारे पास अपने समाज की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने का अवसर है। हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि आने वाले समय में हमारे समाज की आवाज पंचायतों में, जनप्रतिनिधियों के बीच और जनहित के फैसलों में किस तरह प्रभावी बनी रहे।

मैं अपने समाज के प्रत्येक भाई से दिल की गहराइयों से निवेदन करता हूँ कि व्यक्तिगत मतभेदों को समाज के व्यापक हितों से ऊपर न रखें। उम्मीदवार की योग्यता, ईमानदारी, जनसेवा और जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी को देखकर निर्णय लें।

यदि हमारा कोई राजपुरोहित भाई योग्य है और समाज तथा क्षेत्र की सेवा करने का संकल्प लेकर मैदान में उतरा है, तो उसके पक्ष में विचार करना हमारा सामाजिक दायित्व समझें।

भाइयों, समाज केवल नाम से नहीं बनता, समाज बनता है एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने से, एक-दूसरे का सम्मान करने से और जरूरत के समय एक-दूसरे का हाथ थामने से।

आज हमारी एकजुटता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। हमें ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए कि हमारे बच्चे गर्व से कह सकें कि हमारे बुजुर्गों ने आपसी मतभेद भुलाकर समाज की प्रगति और सम्मान के लिए मिलकर प्रयास किया था।

इसलिए मेरे प्यारे भाइयों, अपने विवेक से निर्णय लें, लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाएँ और समाज की एकता को सर्वोपरि रखें।

क्योंकि समाज मजबूत होगा, तभी हमारी आवाज मजबूत होगी। हमारी आवाज मजबूत होगी, तभी हमारी समस्याओं और अधिकारों को उचित मंच मिल सकेगा।

 आइए, आपसी मनमुटाव मिटाएँ, भाईचारा बढ़ाएँ और समाज की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने का संकल्प लें।

जय राजपुरोहित समाज!
जय श्री खेतेश्वर महाराज 

RAJPUROHIT SAMAJ INDIA 
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12.10.26

बावड़ी कलां के किशन सिंह राजपुरोहित बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पाली के बाली गवर्नमेंट कॉलेज में पदभार ग्रहण किया

सफलता की नई उड़ान: फलोदी के बावड़ी कलां निवासी किशन सिंह राजपुरोहित बने असिस्टेंट प्रोफेसर।

बावड़ी कलां (फलोदी) किशन सिंह पुत्र श्री उदय सिंह जी राजपुरोहित ने असिस्टेंट प्रोफेसर,संस्कृत के रूप में गवर्नमेंट कॉलेज,बाली (पाली) में कार्यग्रहण किया।


हार्दिक शुभकामनाएँ एवं उज्जवल भविष्य की कामनाए राजपुरोहित समाज इण्डिया 

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4.10.26

श्री तुलछाराम जी महाराज के अवतरण दिवस पर वृंदावन ग्रुप की अनोखी भेंट, 7 किलो चाँदी से किया सम्मान

श्री तुलछाराम जी महाराज के अवतरण दिवस पर वृंदावन ग्रुप की अनोखी भेंट, 7 किलो चाँदी से किया सम्मान 

ब्रह्म सावित्री पीठाधीश्वर गुरुदेव श्री श्री 1008 श्री तुलछाराम जी महाराज के पावन अवतरण दिवस के अवसर पर वृंदावन ग्रुप की ओर से 7 किलो चाँदी से निर्मित पगड़ी, कमंडल, कलश, लोटा, ग्लास एवं 30 चाँदी की मालाएँ भेंट की गईं। वीडियो देखें  Rajpurohit Samaj India 
गुरुदेव के पावन चरणों में कोटि कोटि नमन 

RAS भर्ती 2024 नियुक्ति आदेश जारी राजपुरोहित समाज के होनहारों प्रतिभाओं को बधाई

RAS भर्ती 2024 नियुक्ति आदेश जारी
1. श्री हरियश जी उजौली (RAS)
2. वर्षा जी बावड़ी (प्रवर्तन निरीक्षक)
3. चम्पत सिंह जी लखा (प्रवर्तन निरीक्षक)
4. दिलीप सिंह जी कनोड़िया (सहायक बाल विकास परियोजना अधिकारी)
5. सवाई सिंह जी तरसिंगडी (RAS)
6. जिगर सिंह जी खाराबेरा (प्रवर्तन निरीक्षक)
7. शैतान सिंह जी बिस्सु (BDO)
8. जयंती लाल जी रामसीन (ACTO)
9. अमृत सिंह जी चंपाखेड़ी (ACTO)
10. चेतन जी जसवंतपुरा (सहकारिता निरीक्षक)
11. सुरेश जी रामसीन (RTS)
12. हरी सिंह जी बावड़ी (RTS)
13. सीमा जी शिवतलाव (RTS)
14. यशंवत कंवर जी पातावा (देवस्थान विभाग)

राजपुरोहित समाज के होनहारों प्रतिभाओं बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएं...राजपुरोहित समाज इण्डिया 

3.10.26

ईशांतनु राजपुरोहित सूरत में आयोजित Taekwondo State Tournament अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन

ईशांतनु सिंह राजपुरोहित (गुड़ा नाल) को सूरत, गुजरात में आयोजित ताइक्वांडो स्टेट टूर्नामेंट (Taekwondo State Tournament) में रेड (Red) बेल्ट या श्रेणी में भाग लेने और अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करने पर बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं!


29.9.26

राजस्थान के लाल श्री गंगा सिंह राजपुरोहित ने गुजरात में रचा गौरव का नया अध्याय!

राष्ट्रपति मुर्मू जी के सम्मान समारोह के कुशल आयोजक — IAS गंगासिंह जी राजपुरोहित 

माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के नर्मदा जिले (गुजरात) के दौरे के दौरान, वहाँ के युवा जिला कलेक्टर IAS श्री गंगासिंह जी राजपुरोहित द्वारा किए गए उत्कृष्ट स्वागत और कुशल प्रबंधन ने प्रशासनिक महकमे में एक बार फिर राजस्थान का मान बढ़ाया है।


IAS श्री गंगा सिंह जी का संक्षिप्त परिचय
बालोतरा जिले के डांडाली गाँव से निकलकर प्रशासनिक सेवा के शिखर पर अपनी छाप छोड़ने वाले IAS श्री गंगासिंह जी राजपुरोहित की यह उपलब्धि पूरे समाज और राजस्थान के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

IAS श्री गंगासिंह जी राजपुरोहित के जीवन संघर्ष और उनकी असाधारण सफलता की कहानी को और भी अधिक प्रेरणादायक बनाती है।
​मात्र 23 वर्ष की कम उम्र में, हिंदी माध्यम से यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा को पहले ही प्रयास या शुरुआती चरणों में पास कर 2017 बैच के IAS अधिकारी बनना और वर्तमान में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित एक छोटे से गाँव डांडाली (बालोतरा) से निकलकर गुजरात के नर्मदा जिले के सबसे युवा जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी सेवा देना—यह राजपुरोहित समाज के हर युवा के लिए एक मिसाल है। 

7.9.26

राजपुरोहित नारी शक्ति द्वारा भव्य लहरिया महोत्सव का आयोजन

बेंगलुरु राजपुरोहित नारी शक्ति द्वारा खेतेश्वर भवन, बेंगलुरु में लहरिया महिला महोत्सव का भव्य एवं रंगारंग आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और महिला शक्ति की अद्भुत झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम श्री गणेश वंदना, गुरु वंदना एवं श्री खेतेश्वर भगवान की महाआरती के साथ किया गया। इसके बाद माता-बहनों ने राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में एक से बढ़कर एक शानदार नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। बच्चों के लिए भी विभिन्न मनोरंजक गेम्स का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

लहरिया की रंग-बिरंगी पोशाकों में सजी माता-बहनों ने सामूहिक रूप से नृत्य, गेम्स और मनोरंजन का भरपूर आनंद लिया। पूरे कार्यक्रम में राजस्थानी संस्कृति, आपसी प्रेम, भाईचारे और महिला एकता की सुंदर मिसाल देखने को मिली। सभी ने मिलकर इस आयोजन को हर्षोल्लास और उत्साह के साथ यादगार बनाया।

इस आयोजन को सफल बनाने में तिजाबेन एवं मोहनजी, कैलाश नगर की ओर से विशेष सहयोग प्रदान किया गया। कार्यक्रम में सभी माता-बहनों ने ₹500 की एंट्री देकर आयोजन में अपना सहयोग दिया।

कार्यक्रम को सफल एवं व्यवस्थित बनाने में श्रीमती इंद्राबेन, गीताबेन, भंवरीबेन, पारुबेन, मंजूबेन, संगीता बेन लीलाबेन चंद्राबेन, पुष्पाबेन, सुशीला बेन, बबली बेन पंकूबेन सहित सभी कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

राजपुरोहित नारी शक्ति ने सभी माताओं, बहनों, बच्चों, सहयोगकर्ताओं एवं कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग और सहभागिता से यह लहरिया महोत्सव बेहद शानदार और यादगार बन सका।

 नारी शक्ति की एकता, राजस्थानी संस्कृति की पहचान और समाज की नई ऊर्जा—यही इस भव्य लहरिया महोत्सव की खूबसूरत पहचान रही। 

सभी सहयोगकर्ताओं एवं मातृशक्ति का हार्दिक आभार। 

31.7.26

हरिद्वार में स्थित समाज के "समाज भवन" की व्यवस्था शानदार है"

अच्छाई की मार्केटिंग 

काफी चीजों में हम समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा चल रही संस्थाओ की व्यवस्थाओं की आलोचना करते है......कमी दिखती है तो आलोचना और सुझाव देना हमारा अधिकार भी है।

लेकिन मेरे व्यकिगत अनुभव के आधार पर "हरिद्वार में स्थित समाज के "समाज भवन" की व्यवस्था शानदार है"

"हर की पौड़ी" जैसे पवित्र स्थान के समीप  स्थित ये भवन हर समाज बन्धु का मस्तक गर्व से ऊँचा करता है,,, शानदार व्यवस्था के लिये सभी ट्रस्टी बंधुओ और संचालको को ह्रदय पूर्वक साधुवाद.....
दूर किसी राज्य में हमारे हिन्दू धर्म के पवित्र धाम पर समाज की इस शानदार व्यवस्था का हर समाज बन्धु को फायदा मिलता है,,,,,,

देव तीर्थ "पुष्कर" में भी स्थित समाज भवन और वहाँ की व्यवस्था शानदार है,,,,
वहाँ के भी सभी पदाधिकारियों और संचालको को साधुवाद......

समाज के लिये ऐसी सकारात्मक चीजों के लिये सभी नीव के पत्थरों को वंदन.....

मै हमेशा कहता हूँ जो हर समाज बन्धु के सुख दुःख में काम आये वहीं "आदर्श समाज" है,,,,

जय गुरुदेव🙏

 पोस्ट by मुकेश सिंह जी शिवतलाव

12.6.26

राजपुरोहित मार्शल कौम है

राजपुरोहित मार्शल कौम है 

हर चुनौती को साहस के साथ 
बड़े धैर्य से पार करते है 


बोली चाली व्यवहारिक कौम है 
बुद्धिजीवी वर्ग है राजपुरोहित 

ज़्यादातर मिठाई के कारोबार से 
देश मे अच्छा नाम है 

राजपुरोहित समाज 
ऐतिहासिक परंपरा 
सेवा भाव अलग से
 पहचान 


संघर्षशीलता इनके ख़ून में है 
ये समाज गौ भक्त है 

ये शब्द,,,,,, 👆
श्री अशोक जी गहलोत पुर्व मुख्यमंत्री राजस्थान

28.12.25

पायल राजपुरोहित का एनसीसी आरडीसी में चयन, क्षेत्र का नाम रोशन

 बागरा क्षेत्र की बेटी पायल

राजपुरोहित ने राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। पायल राजपुरोहित का चयन एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) के लिए हुआ है, जिसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बगसिंह राजपुरोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि पायल राजपुरोहित, अर्जुनसिंह राजपुरोहित की पुत्री हैं तथा मूल रूप से बड़ावास की निवासी हैं, जो वर्तमान में हैदराबाद में रहकर अध्ययनरत हैं। उनका चयन कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर परिश्रम का परिणाम है। एनसीसी आरडीसी में देशभर से चुनिंदा श्रेष्ठ कैडेट्स को शामिल होने का अवसर मिलता है। इस शिविर में सहभागिता कर पायल गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।

पायल की इस सफलता से परिवार, समाजजनों एवं ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं दी हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि समूचे राजपुरोहित समाज और बागरा क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

जालौर जिले की होनहार बेटी पायल राजपुरोहित, सुपुत्री अर्जुनजी बागरा, के आज एनसीसी (NCC) आरडीसी – दिल्ली के लिए चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं हम कामना करते हैं कि पायल आगे भी इसी तरह जिले, प्रदेश और देश का नाम रोशन करती रहें और युवाओं के लिए प्रेरणा बनें.. सुगना फाउंडेशन व राजपुरोहित समाज इण्डिया 

22.11.25

पाली कांग्रेस की कमान अब शिशुपाल सिंह राजपुरोहित के हाथ, कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल

​ बड़ी खबर: पाली कांग्रेस
​शिशुपाल सिंह राजपुरोहित (निंबाड़ा) बने पाली जिला कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष!
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व में एक बड़ा निर्णय लेते हुए वरिष्ठ और लोकप्रिय नेता श्री शिशुपाल सिंह राजपुरोहित निम्बाड़ा को पाली जिला कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है इस घोषणा के साथ ही पाली जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में हर्ष की लहर। आप श्री पूर्व में पाली जिला युथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी रहे हैं श्री राजपुरोहित को 'छत्तीस कौम का लाडला' और जमीनी नेता माना जाता है। उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलते हैं उनकी नियुक्ति पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने उनको बधाई दी।

 श्री राजपुरोहित के अध्यक्ष बनने पर जिले में संगठन को एक नई मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिलेगा। उनके अध्यक्ष बनने के बाद सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं संदेशों का तांता लगा हुआ है।

कांग्रेस के लोकप्रिय नेता, हमारे परम आत्मीय स्नेही, छत्तिस कौम के लाडले, श्री शिशुपालसिंह जी राजपुरोहित निम्बाडा को पाली जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनने पर बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं .... टीम सुगना फाऊंडेशन भारत और राजपुरोहित समाज इंडिया

कांग्रेस ने घोषित किए 45 जिलों के जिलाध्यक्ष: गहलोत,पायलट और डोटासरा समर्थकों को मिली जगह । नीचे दी गई लिस्ट में देखें किसको कौन से जिले का अध्यक्ष बनाया गया।




19.11.25

ऐतिहासिक पहल! RSFI ने DU-JNU के छात्रों को जोड़ा, राजपुरोहित समाज में बौद्धिक क्रांति की शुरुआत

यह एक ऐतिहासिक पहल है! राजपुरोहित स्टूडेंट फॉर इंडिया (RSFI) द्वारा आयोजित यह अभूतपूर्व शैक्षणिक मिलन अपनी तरह का पहला ऐसा मंच बना, जिसने राजपुरोहित समाज में आशा, नवचेतना और बौद्धिक ऊर्जा का संचार किया। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रतिभाशाली युवा शक्ति ने एक मंच पर आकर समाज की प्रगति के लिए प्रगतिशील और दूरदर्शी विचारों पर गहन मंथन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सामाजिक परिवर्तनों के साथ कदम मिलाने और परिवर्तन का वाहक बनने के लिए प्रेरित करना था। 

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा। यहाँ वक्ताओं और छात्रों के बीच सीधा क्रॉस-क्वेश्चनिंग हुआ और भोजन के दौरान भी खुले संवाद में विचारों का अनौपचारिक आदान-प्रदान चलता रहा। छात्रों ने चुनौतियों को संबोधित करने के लिए ठोस रणनीति बनाने का संकल्प लिया। 


सत्र को विशिष्ट मार्गदर्शन प्राप्त हुआ: डॉ. जगदीश सिंह जी, रूपावास (असिस्टेंट प्रोफेसर, DU) ने छात्र जीवन को प्रबंधित करने पर अपने अनुभव साझा किए; एडवोकेट गौरव राज सिंह जी, जूड़िया ने समाज में बालिका शिक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया; पूरण सिंह जी, बागरा (सीनियर मेंटर, Vision IAS) ने आधुनिकता और संस्कृति के बीच संतुलन पर बात की, वहीं संजय सिंह जी, देसलसर (सीनियर मैनेजर) ने राजपुरोहित समाज की सांस्कृतिक समृद्धि पर प्रकाश डाला।पूरे कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन विपुल सिंह जी, डंडली (IIMC, दिल्ली) द्वारा किया गया! 
इस सफल कार्यक्रम का प्रबंधन विशेष रूप से RSFI की JNU कोर टीम के वरिष्ठ छात्रों द्वारा किया गया, जिनमें तरुण सिंह जी, धरमधारी; धीरज सिंह जी, तालकिया, मोती सिंह जी, मिथोड़ा, कुलदीप सिंह जी, कल्याणपुरा पुरोहितान, जगदीश सिंह जी, बालासर और विपुल सिंह जी, सिरोड़ी, RSP रियाँ बड़ी, रिद्धि जी सांचौर। प्रवीण जी लुम्बावास शामिल थे। । यह आयोजन स्पष्ट करता है कि राजपुरोहित समाज का भविष्य, सक्षम, संकल्पित और संवादप्रिय युवा नेतृत्व के हाथों में सुरक्षित है। यह मिलन समाज में एक नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है।

17.11.25

राष्ट्रीय स्तर पर धाक: राजपुरोहित ने अखिल भारतीय विज्ञान मेला में जीता तृतीय स्थान

किशोर सिंह सुपुत्र दयाल सिंह जी राजपुरोहित धारणा द्वारा अखिल भारतीय विज्ञान मेला मेरठ (उत्तरप्रदेश) में रसायन विज्ञान प्रयोग में अखिल भारतीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।

समाज के लिए गौरव का विषय 
वर्तमान मे किशोर सिंह आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक, माजीवाला मे अध्ययनरत है उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं सुगना फाउंडेशन भारत व राजपुरोहित समाज इण्डिया 

16.11.25

सीआई रवींद्रपाल सिंह को राजीव गांधी नगर थानाधिकारी लगने पर सुगना फाउंडेशन ने दी बधाई

जोधपुर आयुक्तालय के तेजतर्रार व कर्तव्यनिष्ठ सर्किल इंस्पेक्टर (CI) रवींद्रपाल सिंह राजपुरोहित (बावड़ी) को राजीव गांधी नगर पुलिस थाने का थानाधिकारी नियुक्त किया गया है। 

​  रवींद्रपाल सिंह राजपुरोहित की कार्यशैली हमेशा सराहनीय रही है और उनकी इस नियुक्ति से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।


सीआई रवींद्रपालसिंह राजपुरोहित बावड़ी को थानाधिकारी राजीव गांधी नगर - जोधपुर आयुक्तालय लगने पर बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ... सुगना फाउंडेशन व राजपुरोहित समाज


14.11.25

श्रीमती गरिमा राजपुरोहित को राजस्थान ब्राह्मण महासभा महिला प्रकोष्ठ का प्रदेशाध्यक्ष मनोनीत किया गया

राजस्थान ब्राह्मण महासभा मध्य प्रदेश ने एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लेते हुए श्रीमती गरिमा राजपुरोहित को महासभा के महिला प्रकोष्ठ का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया है।

​श्रीमती राजपुरोहित गुड़ा नाल सिवाना की निवासी को महासभा के अध्यक्ष श्री केशरी चंद शर्मा द्वारा किया गया। यह घोषणा राजस्थान ब्राह्मण महासभा के मुख्यालय, जयपुर शहर से की गई।
​यह नियुक्ति संगठन में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

​ श्री केशरी चंद शर्मा, अध्यक्ष, राजस्थान ब्राह्मण महासभा ने श्रीमती गरिमा राजपुरोहित को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महिला प्रकोष्ठ समाज सेवा और संगठन के उद्देश्यों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

2.11.25

डंडाली गांव में गौरवशाली पहल: मुख्य चौराहा अब 'श्री खेतेश्वर सर्कल' के नाम से जाना जाएगा।

 राजस्थान के बालोतरा जिले के डंडाली गांव के लिए गौरव और श्रद्धा से भरा रहा, जहाँ गांव के मुख्य और व्यस्ततम चौराहे का नामकरण 'श्री खेतेश्वर सर्कल' के रूप में किया गया। यह चौराहा बालोतरा, सिणधरी, बाड़मेर और बायतु की ओर जाने वाले मार्गों को जोड़ता है, जिससे यह क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु बन गया है।
​ युवा शक्ति का रहा ऐतिहासिक सहयोग
​यह ऐतिहासिक नामकरण समारोह मुख्य रूप से समस्त युवा शक्ति डंडाली के अथक प्रयासों और सहयोग से संभव हुआ। युवाओं ने मिलकर समाज के प्रेरणास्रोत और पूज्यनीय ब्रह्मऋषि श्रीश्री 1008 श्री खेतेश्वर महाराज के नाम पर इस सर्कल का नाम रखने का संकल्प लिया था, जिसे गांव के बुजुर्गों और प्रतिष्ठित नागरिकों का भी पूर्ण समर्थन मिला।

​ यातायात का महत्वपूर्ण
​डंडाली का यह चार रास्ता यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब 'श्री खेतेश्वर सर्कल' के रूप में जाना जाने वाला यह चौराहा न केवल यात्रियों को दिशा देगा, इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को भी श्री श्री 1008 श्री खेतेश्वर महाराज के आदर्शों और शिक्षाओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

​ उत्साहपूर्ण रहा कार्यक्रम
​नामकरण समारोह के दौरान ग्रामीण उपस्थित रहे। युवाओं के साथ-साथ गणमान्य नागरिकों ने भी श्री खेतेश्वर सर्कल के नामकरण पर खुशी व्यक्त की और इस कदम को सामाजिक सद्भाव की दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम बताया। गांव वासियों ने इस पहल के लिए युवा शक्ति को साधुवाद दिया।

राजपुरोहित समाज एक ऐसी जाति है जिसे बहुत उच्च दर्जे से देखा जाता है

क्या राजपुरोहित समाज का नाम एक उपाधि के कारण पड़ा? सत्य क्या है?

राजपुरोहित समाज एक ऐसी जाति है जिसे बहुत उच्च दर्जे से देखा जाता है। इसके बारे में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। यह योद्धा जाति अब बहुत कम संख्या में बची है, यहाँ तक कि राजस्थान में भी बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं। इसके नाम को लेकर कई दंतकथाएँ मौजूद हैं। इनमें से एक प्रमुख कथा यह है कि अलग-अलग ब्राह्मण, जो राजपुरोहित पद पर थे, उनसे मिलकर यह जाति बनी। एक अन्य मान्यता यह है कि राजपुरोहित नाम महज 50 वर्ष पहले ही पड़ा है, अन्यथा ये त केवल 'पुरोहित' ही थे। साक्ष्यों के अभाव में इस तरह की अनेक कथाएँ और कहानियाँ प्रचलित रही हैं। आइए, पड़ताल करते हैं कि आखिर सच्चाई क्या है? समाज के नाम को लेकर लोगों में इतनी गलतफहमियाँ क्यों हैं।

राजपुरोहित समाज मुख्यतः कृषि और युद्ध से जुड़ा रहा है। सांस्कृतिक तौर पर, राजपुरोहित, राजपूत और चारण समाज के त्रिक (trio) का हिस्सा रहे हैं। ये तीनों ही समाज शाक्त परंपरा से आते हैं, हालाँकि राजपुरोहित समाज में शैव धर्म की प्रधानता भी रही है।

प्राचीन काल में जब ऋषि-मुनियों का युग था, वे ही समाज को दिशा दिया करते थे। उस समय समाज वर्णों में नहीं बंटा था। पुरोहित मुख्य तौर पर समाज के शीर्षस्थ सदस्य होते थे। इन्हीं पुरोहितों में से कुछ लोग ऋषि बन जाते थे। ये ऋषि दो प्रकार के होते थे - 'राजऋषि' और 'ब्रह्मऋषि'। यह कोई वर्ण व्यवस्था नहीं थी। राजऋषि वे ऋषि होते थे जो राजदरबारों या राजाओं को मार्गदर्शन देते थे, जबकि ब्रह्मऋषि धार्मिक कार्यों तथा अन्य आध्यात्मिक क्रियाकलापों में संलग्न रहते थे।

जब समाज कार्य के आधार पर वर्णों में विभाजित होने लगा, तब ये ऋषि ब्राह्मण अथवा क्षत्रिय बन सकते थे। अर्थात, पुरोहितों का समूह धीरे-धीरे वर्णाश्रम व्यवस्था में बँटने लगा। इन्हीं पुरोहितों में कुछ समूह ऐसे भी थे जिन्होंने कभी वर्ण व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया। ये पुरोहित ज्यादातर युद्ध संबंधी कार्यों से जुड़े थे। इन्हीं पुरोहितों को 'राजगुरु पुरोहित' भी कहा जाता था। जो पुरोहित ब्रह्मऋषि बने और फिर ब्राह्मण वर्ण में स्थापित हुए, वे 'ब्राह्मण पुरोहित' कहलाए।

समय के साथ, ब्राह्मण पुरोहित कर्मकांडों में लिप्त होते गए, वहीं राजगुरु पुरोहित लगातार शासकों को निर्देशित करते रहे और युद्धों आदि में संलग्न रहे। इनका कर्मकांडी ब्राह्मण पुरोहितों से कभी कोई लेना-देना नहीं था और ये एक मुक्त तथा स्वतंत्र समाज के रूप में दूरस्थ इलाकों में स्थापित होते गए। परन्तु लगातार युद्धों में भाग लेने, कठोर सामाजिक नियमों का पालन करने तथा विपरीत परिस्थितियों में रहने के कारण इनकी संख्या लगातार घटती गई। वहीं, वर्ण व्यवस्था में बँधे ब्राह्मण पुरोहित समय के साथ स्थापित भी हुए और उनकी शक्ति भी बढ़ी।

ये रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले राजगुरु पुरोहित प्राकृत भाषा बोलने वाले लोग थे, जो कालांतर में मारवाड़ी भाषा के रूप में विकसित हुई। इन्हीं के कारण इनके स्थानीय नाम अस्तित्व में आए, जैसे प्रोहित, पिरोयत, परोत इत्यादि, परंतु आधिकारिक रूप से ये 'राजगुरु पुरोहित' के रूप में दर्ज होते थे।

समय के साथ, जैसे-जैसे वर्ण व्यवस्था का प्रभाव बढ़ा, इन राजगुरु पुरोहितों का प्रभाव और शक्ति क्षीण होती गई और ये अपना ऐतिहासिक स्वरूप खोते गए। अब ये अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए संघर्ष करने लगे और अपनी क्रमबद्ध साहित्य रचना से वंचित रहने लगे। वर्णव्यवस्था के प्रभाव में लोग इन्हें भूलवश ब्राह्मण पुरोहित समझने लगे। कहीं-कहीं, समझ और जानकारी के अभाव में, ताम्रपत्रों और देवलियों पर 'ब्राह्मण' शब्द लिख दिया जाता था, जिससे इनके बारे में और अधिक भ्रामक जानकारी फैलने लगी। इसी भ्रम को दूर करने के लिए, भाट-बहियों में इनकी उत्पत्ति बताने हेतु ब्राह्मण उत्पत्ति का सहारा लिया जाने लगा, जबकि कई जगह इस समाज की कुछ गोत्रों की उत्पत्ति राजपूत जातियों से या अग्नि से बताई गई। कालांतर में उत्पन्न हुए इसी भ्रम तथा पूर्ण जानकारी के अभाव से ऐसी स्थितियाँ पैदा हुईं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रारंभिक कालखंड में ब्राह्मण को ब्रह्मा के मुख से उत्पन्न तथा पुरोहितों को अग्नि से उत्पन्न होने की बात कही गई थी।

अब राजगुरु पुरोहित समाज एक ऐसा समुदाय बनकर रह गया था, जिसने अपने प्राचीन गुणों को समेटे रखा था, और जिसके बारे में लोगों के लिए उसे राजपूत, पुरोहित अथवा ब्राह्मण के खाँचों में विभेदित करना कठिन हो गया। जब राज्यों में राजपुरोहित पद का अनिवार्यकरण होने लगा, तो जहाँ ब्राह्मण पुरोहित प्रभावी थे, वे वहाँ राजपुरोहित बने; और जहाँ राजगुरु पुरोहित प्रभावी थे। वे वहाँ राजपुरोहित बने। ब्राह्मण पुरोहित राजपुरोहित पद पर वंशानुगत नहीं थे, परंतु राजगुरु पुरोहित वंशानुगत थे और उन्हें अपने गुणों के कारण 'राजपुरोहित' जाति का टाइटल भी मिला। यह टाइटल हमें 16वीं शताब्दी के एक राजपुरोहित सती जी के शिलालेख के माध्यम से पता चलता है। इससे पता चलता है कि देशज नामों के साथ-साथ आधिकारिक नाम, जैसे 'राजगुरु पुरोहित' अथवा 'राजपुरोहित' भी खूब प्रचलित थे।

1910 में राजपुरोहित हितकारिणी सभा, बीकानेर की स्थापना से हमें ज्ञात होता है कि 'राजपुरोहित' टाइटल का प्रयोग बिल्कुल भी नया नहीं है। बाद में, एकरूपता तथा अपनी स्वतंत्र पहचान कायम करने के लिए यह नाम संपूर्ण समाज द्वारा अपनाया गया। इस प्रकार हमें पता चलता है कि साक्ष्यों के अभाव में राजपुरोहित समाज का जबरन ब्राह्मणीकरण करने का प्रयास समय-समय पर किया गया, परन्तु ये प्रयास कामयाब नहीं हो सके। एक समाज, जिसके लिए एक समय अपना अस्तित्व बचा पाना भी मुश्किल रहा हो, उससे आधिकारिक दस्तावेजीकरण की उम्मीद करना उचित नहीं है।

1.11.25

कांस्टेबल रमेश पुरोहित को महानिदेशक पुलिस प्रशस्ति पत्र से सम्मानित

महानिदेशक पुलिस मेडल से सम्मानित

         साइबर अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने, करोड़ों की साइबर ठगी के अज्ञात अपराधियों का सुराग लगाकर हाईटेक साइबर गैंग का खुलासा करने ,उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करवाने तथा पीड़ित व्यक्ति को राहत पहुंचाने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने से महानिदेशक पुलिस मेडल के लिए चयन किया गया। 
पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार दिनांक 31 अक्टूबर 2025 को रेंज मुख्यालय जोधपुर में एक कार्यक्रम आयोजित कर सिरोही जिले से श्री रमेश पुरोहित कांस्टेबल जिला साइबर सेल सिरोही को महानिरीक्षक पुलिस जोधपुर रेंज जोधपुर श्री राजेश कुमार आईपीएस द्वारा महानिदेशक पुलिस प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।

​💻 सम्मान का कारण
​उन्हें यह सम्मान निम्नलिखित उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रदान किया गया:
○ ​साइबर अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करना।
​○ करोड़ों की साइबर ठगी के अज्ञात अपराधियों का सुराग लगाना।
​○ हाईटेक साइबर गैंग का खुलासा करना और उनकी गिरफ्तारी  सुनिश्चित करवाना।
​○ पीड़ित व्यक्ति को राहत पहुंचाना।

​श्री रमेश पुरोहित जी, 
​आपकी यह उपलब्धि मेहनत, ईमानदारी और उच्च समर्पण का प्रमाण है। हम कामना करते हैं कि आप इसी उत्साह और निष्ठा के साथ राष्ट्र और समाज की सेवा करते रहें। ​भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ.. सुगना फाउंडेशन भारत व राजपुरोहित समाज इण्डिया 

31.10.25

राजपुरोहित सेवा न्यास, जोधपुर प्रतिभावान विद्यार्थी–सम्मान समारोह-2025

सूचना/आमंत्रण
  
  देवतुल्य समाज बन्धुओं ! 
सादर जय श्री रघुनाथ जी री सा।
 प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी राजपुरोहित सेवा न्यास,जोधपुर द्वारा आयोजित प्रतिभावान विद्यार्थी–सम्मान समारोह-2025 
हेतु निम्नानुसार योग्यताएँ निर्धारित की गईं हैं 

● कक्षा 10 वीं व 12 वीं के छात्र- छात्राएँ जिन्होंने वर्ष-2025 की बोर्ड परीक्षा में 85% या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हों।  
  ● स्नातक परीक्षाओं में वे छात्र-छात्राएँ जिन्होंने वर्ष–2025 में 75% या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हों।  
● स्नातकोत्तर परीक्षाओं में वे छात्र-छात्राएँ जिन्होंने वर्ष–2025 में 70% या इससे अधिक अंक प्राप्त किए हों।  
 ● NCC में "C " सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाले विद्यार्थी । 
● स्काउट्स में राष्ट्रपति-पुरस्कार प्राप्तकर्ता ।
● CA व CS वर्ष 2025 में चयनित विद्यार्थी।
● NDA / CDS वर्ष 2025 में चयनित विद्यार्थी ।
 ● IIT  तथा NLU वर्ष 2025 में चयनित व राजकीय मेडिकल कॉलेज* से MBBS में चयन होने वाले विद्यार्थी।
 ● अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल–कूद प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागी।
 ● आप अपनी योग्यता से सम्बंधित स्व सत्यापित प्रमाण पत्र/दस्तावेज 
दिनांक :-20 नवम्बर -2025 तक अपना नाम-गांव का नाम एंव मोबाइल नम्बर सहित निम्न गुगल फॉर्म में मूल (ओरिजनल) दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें।
● Class 10th में आवेदन के लिए निम्न लिंक का उपयोग करे 
https://forms.gle/YSep6T8vYyrvs5EHA

 ● Class 12th में आवेदन के लिए निम्न लिंक का उपयोग करे
https://forms.gle/oWsZfiiDzizwzgsN9    

● UG, PG या Others में आवेदन के लिए निम्न लिंक का उपयोग करें
https://forms.gle/AZwv7YXnaLxeCGC5A

(उपरोक्त लिंक के अलावा किसी भी माध्यम से भेजा गया आवेदन स्वीकार (मान्य) नही होगा)

 नोट -सभी विद्यार्थियों से निवेदन है कि अनिवार्य रूप से अपनी मूल अंकतालिका कार्यक्रम में साथ में लेकर पधारें।

नोट:-अंतिम दिनांक (20 नवम्बर 2025 ) के पश्चात किसी भी आवेदन पत्र पर कोई विचार नहीं कया जाएगा।
◆ पता:- होटल विले पारले,डीपीएस चौराहा पाल रोड, जोधपुर (राज.)पिन-342001   सम्पर्क नम्बर: - 9887236621 , 7014780010

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