न्यूज़ हेडलाइंस Post

Followers

यह ब्लॉग समर्पित है!

"संत श्री 1008 श्री खेतेश्वर महाराज" एवं " दुनिया भर में रहने वाले राजपुरोहित समाज को यह वेबसाइट समर्पित है" इसमें आपका स्वागत है और साथ ही इस वेबसाइट में राजपुरोहित समाज की धार्मिक, सांस्‍क्रतिक और सामाजिक न्‍यूज या प्रोग्राम की फोटो और विडियो को यहाँ प्रकाशित की जाएगी ! और मैने सभी राजपुरोहित समाज के लोगो को एकीकृत करने का ऐसा विचार किया है ताकि आप सभी को राजपुरोहित समाज के लोगो को खोजने में सुविधा हो सके! आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं तो फिर तैयार हो जाईये! "हमारे किसी भी वेबसाइट पर आपका हमेशा स्वागत है!"
वेबसाइट व्यवस्थापक सवाई सिंह राजपुरोहित-आगरा{सदस्य} सुगना फाऊंडेशन-मेघलासिया जोधपुर 09286464911

मेरे साथ फेसबुक से जुडिए

1.12.16

श्रीध्यानारामजी महाराज के बालिका संस्कार शिविरों की उपयोगिता के माने

बालिका संस्कार प्रेरणा शिविर आसोतरा
सवाई सिहं सदस्य सुगना फाउंडेशन

पूज्य श्री ध्यानाराम जी महाराज के बालिका संस्कार शिविरों की उपयोगिता के माने है एक संस्कारसंपन्न व सदगुण संपन्न बालिका अर्थात भविष्य की मातृशक्ति इस आधुनिक भौतिकता से जंजाल से परिवार व समाज को काफी हद तक सुरक्षित रख सकती है ।

            पश्चिमीकरण व उच्छृंखलता के समाज जीवन पर नित नए हो रहे आघातों से परिवार व समाज को बचाने का काम एक संस्कारित स्त्री ही  बखुबी कर सकती है ।जब हम चारो तरफ़ फैल रही विडंबनाओं के इन मकड़जाल को देखते हैं तब गुरुजी के संस्कार शिविरों के महत्व का मुल्यांकन हजार गुणा बढ जाता है ।
स्त्री पुरुष को सदैव उत्साहित करती है ।

  पुरुष को प्रेरणा देकर स्त्री ने समाज के विकास और कल्याणकारी कार्यों में लगाया  है और बुरे से बुरे असामाजिक कार्यों में संलग्न पुरुषों को भी सच्ची स्त्री ने जीवन निर्माण का मार्ग भी दिखाया है । काव्यशास्त्रियों ने भी व्यक्तियों पर काव्य के प्रभाव की तुलना नारी के सुमधुर वाक्यों से इस प्रकार की है '' कान्तासम्मित तयोपदेशयुजे । '' अर्थात  काव्य मनुष्य के जीवन में प्रियतमा के सामान उपदेश करने वाला होता है ।

स्त्री  में वह शक्ति है कि वह अपने सद्व्यवहार से , सरस वाणी से ,मर्यादित जीवन से तथा सद्कार्यों से पुरुष को कर्तव्याकर्तव्य का बोध करा कर ,सुपथ पर चला कर सामाजिक नियमों के विरुद्ध आचरण करने से रोक सकती है । अथवा हम यह कह सकते हैं कि  स्त्री की वाणी में प्रभाव , कार्यों में त्याग और प्रतिशोध में वह शक्ति है कि वह पुरुष में बड़े से बड़ा परिवर्तन ला सकती है । इसीलिए स्त्री को निर्मात्री कहा जाता है । स्त्री अपने ह्रदय की पवित्रता  के कारण सब पर पूर्ण विश्वास करती हुई परिवार को उन्नति की और अग्रसरित करती है । स्त्री की वाणी के प्रभाव से पुरुष ने स्त्री की रक्षा ,समाज के कल्याण , परिवार के अभ्युदय और परोपकार की भावना से मानवता के भावों का परिपालन किया है ।
आदर्श नारियों में अग्रगण्य सती  सीता ने अत्यंत कष्ट  सहकर  भी वन में वाल्मीकि के आश्रम में दुखों को सहते हुए लव - कुश जैसी संतान देकर अच्छे समाज का निर्माण  किया ।
स्त्री के बिना मनुष्य शक्तिहीन , उत्साहहीन , पुरुषार्थहीन और चेतनाशून्य सा हो जाता है । स्त्रियाँ अपने जीवन में सिद्धांतपक्ष की अपेक्षा व्यवहारिकपक्ष पर अधिक बल देती हैं । स्त्री सौम्य रूप से एवं मर्यादा में रहकर निर्माण का कार्य बहुत ही अच्छे से कर सकती है । स्त्री ने अपने कार्यों एवं सद्व्यवस्था  में सर्वप्रथम अपने परिवार का निर्माण किया है । उसके पश्चात समाज के निर्माण में  भी योगदान दिया है । स्त्री यदि निर्माण कार्य  अच्छी प्रकार जानती है तो कुपित होने पर विनाश कार्य  भी अच्छी प्रकार जानती है। स्त्री के कार्यों एवं विचारों से उसे समाज में उच्च स्थान पर प्रतिष्ठित किया है । अतः  समाज के निर्माण में स्त्री का योगदान चिरस्मरणीय और आदर के योग्य है ।
ये संस्कार शिविर स्त्री जाति की इसी सुप्त चेतनाशक्ती  को जगाने व परिष्कृत करने का प्रयास है ।

श्री पुखराज सावंतवाडी


No comments:

Post a Comment

thank u dear
Join fb Page
https://www.facebook.com/rajpurohitpage

हिंदी में लिखिए अपनी...

रोमन में लिखकर स्पेस दीजिए और थोड़ा सा इंतजार कीजिए .... सुगना फाऊंडेशन-मेघालासिया जैसे :- Ram (स्पेस) = राम
अब इस कॉपी करे और पेस्ट करे...सवाई आगरा

आपका लोकप्रिय ब्लॉग अब फेसबुक पर अभी लाइक करे .



Like & Share

Share us

ट्विटर पर फ़ॉलो करें!

Contact me

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Nivedan Hai