पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा 'आनंद कुटीर' आश्रम अध्यात्म का एक ऐसा केंद्र है, जहाँ कदम रखते ही अशांत मन भी शांत हो जाता है। इस आश्रम के मार्गदर्शक थे। परम पूज्य गुरु श्री चेतनानंद सरस्वती महाराज जी उनका चेहरा हमेशा एक दिव्य आभा से चमकता रहता था, और उनकी वाणी में ऐसी मिठास है कि सुनने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता।
महाराज जी का एक ही मूल मंत्र है "बाहर की दुनिया को कितना भी सजा लो, जब तक भीतर का दीया नहीं जलेगा, जीवन में भटकाव और अंधेरा बना रहेगा।"
गुरु पूर्णिमा पर आप इस आश्रम में जरूर पहुंचे गुरु महाराज जी का आशीर्वाद लीजिए
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