मेरे प्यारे राजपुरोहित समाज के सभी भाई-बंधुओं, गिणायतों और समाज के शुभचिंतकों से हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है।
राजस्थान में पंचायती राज चुनावों का दौर चल रहा है। इस चुनावी मैदान में हमारे समाज के भी कई भाई अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वे केवल अपनी जीत के लिए नहीं, बल्कि समाज की राजनीतिक भागीदारी, पहचान और आने वाले समय में हमारे समाज की आवाज को मजबूत बनाए रखने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
आज वक्त है सोचने का, समझने का और एकजुट होने का।
मेरे भाइयों, आपस में मतभेद हो सकते हैं, मनभेद हो सकते हैं, किसी से नाराजगी हो सकती है, विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन क्या इन सबके कारण हम अपने ही समाज के भविष्य को कमजोर होते हुए देख सकते हैं?
आज अगर हम आपसी खींचतान और छोटी-छोटी नाराजगियों में उलझकर एक-दूसरे का साथ नहीं देंगे, तो कल जब राजनीति में हमारे समाज की आवाज कमजोर होगी, तब हमारे पास पछतावे के सिवाय क्या बचेगा?
याद रखना भाइयों, समय निकल जाने के बाद अफसोस करने से अवसर वापस नहीं आते।
आज हमारे पास अपने समाज की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने का अवसर है। हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि आने वाले समय में हमारे समाज की आवाज पंचायतों में, जनप्रतिनिधियों के बीच और जनहित के फैसलों में किस तरह प्रभावी बनी रहे।
मैं अपने समाज के प्रत्येक भाई से दिल की गहराइयों से निवेदन करता हूँ कि व्यक्तिगत मतभेदों को समाज के व्यापक हितों से ऊपर न रखें। उम्मीदवार की योग्यता, ईमानदारी, जनसेवा और जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी को देखकर निर्णय लें।
यदि हमारा कोई राजपुरोहित भाई योग्य है और समाज तथा क्षेत्र की सेवा करने का संकल्प लेकर मैदान में उतरा है, तो उसके पक्ष में विचार करना हमारा सामाजिक दायित्व समझें।
भाइयों, समाज केवल नाम से नहीं बनता, समाज बनता है एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने से, एक-दूसरे का सम्मान करने से और जरूरत के समय एक-दूसरे का हाथ थामने से।
आज हमारी एकजुटता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती है। हमें ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए कि हमारे बच्चे गर्व से कह सकें कि हमारे बुजुर्गों ने आपसी मतभेद भुलाकर समाज की प्रगति और सम्मान के लिए मिलकर प्रयास किया था।
इसलिए मेरे प्यारे भाइयों, अपने विवेक से निर्णय लें, लोकतंत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाएँ और समाज की एकता को सर्वोपरि रखें।
क्योंकि समाज मजबूत होगा, तभी हमारी आवाज मजबूत होगी। हमारी आवाज मजबूत होगी, तभी हमारी समस्याओं और अधिकारों को उचित मंच मिल सकेगा।
आइए, आपसी मनमुटाव मिटाएँ, भाईचारा बढ़ाएँ और समाज की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने का संकल्प लें।
जय राजपुरोहित समाज!
जय श्री खेतेश्वर महाराज
RAJPUROHIT SAMAJ INDIA
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